अथर्ववेद का कांड 2: जीवन की सुरक्षा और शक्ति का मंत्र-दर्शन अथर्ववेद को 'ब्रह्मवेद' भी कहा जाता है। यह वेद हमें जीवन के विभिन्न रहस्यों, चिकित्सा विज्ञान और आत्मबल बढ़ाने के मंत्र प्रदान करता है। इस वेद के द्वितीय कांड में ऐसे अद्भुत सूक्त संकलित हैं, जो मनुष्य को भय से मुक्त कराने वाले तथा उसे आंतरिक और बाह्य शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने की प्रेरणा देते हैं . आइए, आज हम इस कांड के दो विशेष मंत्र-समूहों को समझते हैं। 1. भयमुक्ति का मंत्र: आत्मप्रेरणा का अद्भुत पाठ (सूक्त 15) अथर्ववेद के दूसरे कांड के 15वें सूक्त में छह अद्भुत मंत्र हैं, जो आत्मा (प्राण) को संबोधित कर भयमुक्त रहने की प्रेरणा देते हैं। यह मंत्र हमें यह अनुभव कराते हैं कि जिस प्रकार प्रकृति के तत्व निडर होकर अपना कार्य करते हैं, उसी प्रकार हमें भी निर्भय होकर जीवन के पथ पर आगे बढ़ना चाहिए . पहला मंत्र: "यथा द्यौश्च पृथिवी च न बिभीतो न रिष्यतः । एवा मे प्राण मा विभेः ॥" अर्थ: हे मेरे प्राण! जिस प्रकार आकाश (द्यौ) और पृथ्वी कभी नहीं डरते और न ही उनका नाश होता है, उसी प्रकार तुम भी निर्भय ...
Indian Granth In The Magic For Success..