सावन के महीने में सोमवार का महत्व क्यों बढ़ जाता है? जानिए धार्मिक, पौराणिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक कारण प्रस्तावना हिंदू धर्म में सावन (श्रावण) का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इस पूरे महीने में भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप, शिव चालीसा का पाठ और सोमवार का व्रत विशेष महत्व रखता है। लेकिन एक प्रश्न अक्सर लोगों के मन में आता है कि आखिर सावन के महीने में सोमवार का महत्व इतना अधिक क्यों होता है? क्या इसका कारण केवल धार्मिक आस्था है, या इसके पीछे कोई पौराणिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक आधार भी मौजूद है? इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि सावन सोमवार क्यों विशेष माने जाते हैं, इनके पीछे कौन-कौन सी मान्यताएँ हैं, व्रत रखने के क्या लाभ बताए गए हैं और पूजा किस प्रकार करनी चाहिए। --- सोमवार और भगवान शिव का संबंध सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवता को समर्पित माना गया है। - रविवार – सूर्य देव - सोमवार – भगवान शिव - मंगलवार – हनुमान जी एवं मंगल देव - बुधवार – भगवान गणेश - गुरुवार – भगवान विष्णु और बृहस्पति - शुक्रवार ...
मेरी दाती रखीं मैनूं चर्णा दे कोल । मेरी दाती तेरे जया कोई न होर। सब थां ठोकरां खा मैं आया । किसे नहीं दाती मैनूं अपनाया। मिली न किधरे वी ठौर-मेरी मैय्या.. सब दे दिलां दी मां तू जाने। मन लत आये तेरे दर आशा पुजानेबनी क्यों मात कठोर-मेरी मैय्या...... जगत दी वाली तू मां अम्बे ।सब ते कृपा कर जगदम्बे । औगन न साडे टटोल मेरी मैय्या..... मन मन्दिर मां जोत है तेरी । स्वास स्वास जपे जगदम्बे मेरी । मंझधार विच न छोड़-मेरी मैय्या...... मोह ममता दल दल विच फसया । कर्म कोई 'चमन' कर न सकया। पई मां अज तेरी लोड़-मेरी मैय्या... चमन नादान मैय्या दर तेरे आया। सब कुछ छड मोह तेरे नाल पाया। खाली न दर तों मोड़-मेरी मैय्या.....