सावन के महीने में सोमवार का महत्व क्यों बढ़ जाता है? जानिए धार्मिक, पौराणिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक कारण प्रस्तावना हिंदू धर्म में सावन (श्रावण) का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इस पूरे महीने में भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप, शिव चालीसा का पाठ और सोमवार का व्रत विशेष महत्व रखता है। लेकिन एक प्रश्न अक्सर लोगों के मन में आता है कि आखिर सावन के महीने में सोमवार का महत्व इतना अधिक क्यों होता है? क्या इसका कारण केवल धार्मिक आस्था है, या इसके पीछे कोई पौराणिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक आधार भी मौजूद है? इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि सावन सोमवार क्यों विशेष माने जाते हैं, इनके पीछे कौन-कौन सी मान्यताएँ हैं, व्रत रखने के क्या लाभ बताए गए हैं और पूजा किस प्रकार करनी चाहिए। --- सोमवार और भगवान शिव का संबंध सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवता को समर्पित माना गया है। - रविवार – सूर्य देव - सोमवार – भगवान शिव - मंगलवार – हनुमान जी एवं मंगल देव - बुधवार – भगवान गणेश - गुरुवार – भगवान विष्णु और बृहस्पति - शुक्रवार ...
पांचवां नवरात्रि: माँ स्कंदमाता की आराधना और महत्व 🌸 नवरात्रि का पाँचवाँ दिन 🌸 माँ स्कंदमाता : ज्ञान, मातृत्व एवं सिद्धियों की अधिष्ठात्री 🪔 पंचमी – स्कंदमाता पूजन 🪔 🌟 पाँचवें नवरात्रि का महत्व शारदीय नवरात्रि का पाँचवाँ दिन माँ दुर्गा के पाँचवें स्वरूप माँ स्कंदमाता को समर्पित है। ‘स्कंद’ का अर्थ है कार्तिकेय, भगवान शिव के पुत्र, और ‘माता’ अर्थात माँ। वे भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं, इसलिए इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। इस दिन साधक की बुद्धि परमात्मा में स्थिर होती है और माँ की कृपा से ज्ञान, वैराग्य एवं सिद्धियों की प्राप्ति होती है। स्कंदमाता का स्वरूप अत्यंत सौम्य एवं करुणामय है। वे चार भुजाओं वाली, सिंहासन पर विराजमान, गोद में बालक स्कंद को लिए हुए हैं। इनकी दो भुजाएँ कमल धारण करती हैं, एक वरद मुद्रा में और दूसरी अभय मुद्रा में। यह मातृत्व का परम प्रेम और शक्ति का अद्भुत संगम है। 🌼 माँ स्कंदमाता : सिंहासनस्था, कमल पुष्पधारिणी, बालक कार्त...