सावन के महीने में सोमवार का महत्व क्यों बढ़ जाता है? जानिए धार्मिक, पौराणिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक कारण प्रस्तावना हिंदू धर्म में सावन (श्रावण) का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इस पूरे महीने में भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप, शिव चालीसा का पाठ और सोमवार का व्रत विशेष महत्व रखता है। लेकिन एक प्रश्न अक्सर लोगों के मन में आता है कि आखिर सावन के महीने में सोमवार का महत्व इतना अधिक क्यों होता है? क्या इसका कारण केवल धार्मिक आस्था है, या इसके पीछे कोई पौराणिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक आधार भी मौजूद है? इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि सावन सोमवार क्यों विशेष माने जाते हैं, इनके पीछे कौन-कौन सी मान्यताएँ हैं, व्रत रखने के क्या लाभ बताए गए हैं और पूजा किस प्रकार करनी चाहिए। --- सोमवार और भगवान शिव का संबंध सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवता को समर्पित माना गया है। - रविवार – सूर्य देव - सोमवार – भगवान शिव - मंगलवार – हनुमान जी एवं मंगल देव - बुधवार – भगवान गणेश - गुरुवार – भगवान विष्णु और बृहस्पति - शुक्रवार ...
जहां दया वहां धर्म है, जहां झूठ कहां तह पापा। जहां लोग को मरण है, कहां गए तुलसीदास।। दाता के दरबार सभी खड़े हाथ जोड़। देने वाला एक है मंगत लाख-करोड़।। प्रभु इतना धन दीजिए जिसमें कुटुंब समये। मैं भी भूखा ना रहूं साधु न भूखा जाए।। आया है सो जाएगा राजा रंक फकीर। एक सिंहासन चढ़ चले एक दावे चले जंजीर।। दो बातों को याद रखो जो चाहे कल्याण। नारायण एक मौत का तुझ श्री भगवान।। बंसी वाले सावरे दीजौ दर्शन एक बार। चरण-शरण की दीजिए छूटे ना तेरा द्वार। बांकी झांकी श्याम की वजह हृदय के बीच।। जब चाहे दर्शन करूं झटपट हरी मीच।। धन जीवन उड़ जाएगा जैसे उड़त कपूर। मन मूरख गोविंद भज जो चाहे जग दूर सुबह सवेरे जाग के थ्रू प्रभु का ध्यान। भजन करो श्री राम का जब सोए कल्याण। कामी क्रोधी लालची इनसे भक्ति न होय। भक्ति करे कोई सूरमा, जात पात ना होए।। लेने को हरि नाम है देने को अन्नदान। तलने को मत दान का, डूबने को अभिमान।। नारायण संसार में भूतप को भरे अनेक। तेरी- मेरी कर चले लेने गये तिल एक।। आज भी तेरा आसरा, कल भी तेरा आस। पलक पलक तेरा आसरा छोड़ू ना बारहो मास। संजीवनी बूटी नाम की ह्रदय लई प...