🌟 3 अप्रैल 2026 का संपूर्ण राशिफल एवं पंचांग | Friday Horoscope & Panchang तिथि: शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026 विक्रम संवत: २०८२ शक संवत: १९४७ ऋतु: वसंत अयन: उत्तरायण 📅 पंचांग – दिन का शुभाशुभ विवरण संक्षिप्त दृश्य: आज का दिन मेष राशि में सूर्य के साथ प्रारंभ होता है, जो नई शुरुआत के लिए ऊर्जा प्रदान करता है। चंद्रमा कर्क राशि में संवेदनशीलता और अंतर्ज्ञान को बढ़ाता है। दिन का मुख्य आकर्षण मीन राशि में बुध और कर्क राशि में बृहस्पति के बीच सामंजस्यपूर्ण त्रिकोण (ट्राइन) है, जो संचार, शिक्षा और यात्रा के क्षेत्रों में सफलता का संकेत देता है। 📍 पंचांग सारांश तिथि: फाल्गुन, कृष्ण पक्ष, द्वादशी (प्रातः 08:47 तक, तत्पश्चात त्रयोदशी) नक्षत्र: श्रवण (दोपहर 01:56 तक, तत्पश्चात धनिष्ठा) करण: तैतुल (प्रातः 08:47 तक), तत्पश्चात गर योग: शुभ (प्रातः 08:29 तक), तत्पश्चात शुक्ल वार: शुक्रवार (भृगुवार) सूर्योदय: प्रातः 06:12 (भारतीय मानक समयानुसार) सूर्यास्त: सायं 06:37 (भारतीय मानक समयानुसार) चंद्रो...
पांचवां नवरात्रि: माँ स्कंदमाता की आराधना और महत्व 🌸 नवरात्रि का पाँचवाँ दिन 🌸 माँ स्कंदमाता : ज्ञान, मातृत्व एवं सिद्धियों की अधिष्ठात्री 🪔 पंचमी – स्कंदमाता पूजन 🪔 🌟 पाँचवें नवरात्रि का महत्व शारदीय नवरात्रि का पाँचवाँ दिन माँ दुर्गा के पाँचवें स्वरूप माँ स्कंदमाता को समर्पित है। ‘स्कंद’ का अर्थ है कार्तिकेय, भगवान शिव के पुत्र, और ‘माता’ अर्थात माँ। वे भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं, इसलिए इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। इस दिन साधक की बुद्धि परमात्मा में स्थिर होती है और माँ की कृपा से ज्ञान, वैराग्य एवं सिद्धियों की प्राप्ति होती है। स्कंदमाता का स्वरूप अत्यंत सौम्य एवं करुणामय है। वे चार भुजाओं वाली, सिंहासन पर विराजमान, गोद में बालक स्कंद को लिए हुए हैं। इनकी दो भुजाएँ कमल धारण करती हैं, एक वरद मुद्रा में और दूसरी अभय मुद्रा में। यह मातृत्व का परम प्रेम और शक्ति का अद्भुत संगम है। 🌼 माँ स्कंदमाता : सिंहासनस्था, कमल पुष्पधारिणी, बालक कार्त...