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जगत के नाथ श्री जगन्नाथ

  प्रस्तावना: जगत के नाथ श्री जगन्नाथ श्री जगन्नाथ मंदिर, पुरी, सनातन धर्म के चार प्रमुख धामों में से एक । यह ओडिशा राज्य के तटवर्ती शहर पुरी में स्थित है। जगन्नाथ शब्द का अर्थ 'जगत के स्वामी' है । यह मंदिर भगवान विष्णु के स्वरूप जगन्नाथ को समर्पित है, जिन्हें स्वयं भगवान श्रीकृष्ण का ही एक रूप माना जाता है । अपनी स्थापना के समय से ही यह मंदिर आस्था, भक्ति और रहस्यों का केंद्र रहा है। इस अद्भुत दिव्य धाम में प्रतिदिन हजारों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं। यह मंदिर न केवल अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इससे जुड़े अनगिनत चमत्कार और रहस्य इसे और भी अद्वितीय बनाते हैं। 🕉️ पौराणिक कथा: मूर्तियों के अधूरे होने का रहस्य मंदिर की मूर्तियों के अधूरे होने के पीछे एक बहुत ही रोचक पौराणिक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि राजा इंद्रद्युम्न को एक रात्रि में स्वप्न आया कि समुद्र के तट पर एक दिव्य दारु ब्रह्म (विशेष लकड़ी) जो आकर गिरेगी, उससे भगवान की मूर्ति बनाई जाए। राजा को भगवान विष्णु ने आदेश दिया कि 'दारु ब्रह्म' को खोजकर उससे अपने प्रिय स्वामी की मूर्ति का निर्माण ...
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हिंदू धर्म के अनुसार कलियुग का अंत

 कैलाश पर्वत के चारों ओर घूमा, जो वास्तव में भगवान के वास का स्थान माना जाता है, और अंततः मानवता की बुराईयों और अज्ञानता से लड़ते हुए, धर्म और सच्चाई की विजय की प्रतीक्षा करना चाहिए। यदि आप हिंदू धर्म के अनुसार कलियुग के अंत के विषय पर गहराई से जानना चाहते हैं, तो यहाँ एक विस्तृत जानकारी दी जा रही है, मैं आपको मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डालने की कोशिश करूंगा, जिससे आप इस विषय पर एक व्यापक दृष्टिकोण प्राप्त कर सकें।  हिंदू धर्म के अनुसार कलियुग का अंत 1. **कलियुग की परिभाषा और विशेषताएँ**    - **कलियुग**: हिंदू धर्म के अनुसार, कलियुग चार युगों (सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, और कलियुग) में से अंतिम युग है। यह युग पतन, अज्ञानता, और पाप का युग माना जाता है। इस युग में धर्म की कमी होती है और मनुष्य के आचरण में गिरावट आती है।    - **विशेषताएँ**: कलियुग में झूठ, अहंकार, और हिंसा की प्रधानता होती है। मानवता की नैतिकता और धर्म में कमी आती है, और यह युग अधिकतम सामाजिक और आध्यात्मिक समस्याओं से भरा हुआ होता है।  2. **कैल्युग का अंत: धार्मिक मान्यताएँ**    -...

हिंदू धर्म में दिन की महत्वपूर्णता:

### हिंदू धर्म में दिन की महत्वपूर्णता: हिंदू धर्म में प्रत्येक दिन और तिथि की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्वता होती है। यह महत्व बहुत सारे तत्वों पर निर्भर करता है, जैसे त्योहार, व्रत, ग्रहों की स्थिति, और धार्मिक मान्यताएँ। यहाँ पर एक विस्तृत जानकारी दी जा रही है: #### 1. **हिंदू कैलेंडर और तिथियाँ**:    - **पंचांग**: हिंदू कैलेंडर को पंचांग कहा जाता है, जिसमें तिथियाँ, नक्षत्र, वार, और योगों की गणना की जाती है। पंचांग के अनुसार, प्रत्येक दिन की एक विशेष स्थिति होती है, जो विभिन्न धार्मिक क्रियाओं और कर्मकांडों को प्रभावित करती है।    - **तिथियाँ**: हिंदू पंचांग में तिथियाँ जैसे अमावस्या, पूर्णिमा, एकादशी, द्वादशी आदि का महत्व होता है। प्रत्येक तिथि की पूजा विधि और धार्मिक महत्व होता है। #### 2. **त्योहार और पर्व**:    - **गणेश चतुर्थी**: भगवान गणेश की पूजा का पर्व, जो गणेश चतुर्थी को मनाया जाता है, हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन भगवान गणेश की मूर्तियों की स्थापना की जाती है और उनके साथ पूजा अर्चना की जाती है।    - **दीवाली...

प्रातः काल प्रभु से अरदास

जहां दया वहां धर्म है, जहां झूठ कहां तह पापा। जहां लोग को मरण है, कहां गए तुलसीदास।। दाता के दरबार सभी खड़े हाथ जोड़। देने वाला एक है मंगत लाख-करोड़।। प्रभु इतना धन दीजिए जिसमें कुटुंब समये। मैं भी भूखा ना रहूं साधु न भूखा जाए।। आया है सो जाएगा राजा रंक फकीर। एक सिंहासन चढ़ चले एक दावे चले जंजीर।। दो बातों को याद रखो जो चाहे कल्याण। नारायण एक मौत का तुझ श्री भगवान।। बंसी वाले सावरे दीजौ दर्शन एक बार। चरण-शरण की दीजिए छूटे ना तेरा द्वार। बांकी झांकी श्याम की वजह हृदय के बीच।। जब चाहे दर्शन करूं झटपट हरी मीच।। धन जीवन उड़ जाएगा जैसे उड़त कपूर। मन मूरख गोविंद भज जो चाहे जग दूर सुबह सवेरे जाग के थ्रू प्रभु का ध्यान। भजन करो श्री राम का जब सोए कल्याण। कामी क्रोधी लालची इनसे भक्ति न होय। भक्ति करे कोई सूरमा, जात पात ना होए।। लेने को हरि नाम है देने को अन्नदान। तलने को मत दान का, डूबने को अभिमान।। नारायण संसार में भूतप को भरे अनेक। तेरी- मेरी कर चले लेने गये तिल एक।। आज भी तेरा आसरा, कल भी तेरा आस। पलक पलक तेरा आसरा छोड़ू ना बारहो मास। संजीवनी बूटी नाम की ह्रदय लई प...

ॐ भूर्भुवः स्वः' गायत्री मंत्र का एक भाग है. इसका अर्थ है- 'हमारे मन को जगाने की अपील करते हुए हम माता से प्रार्थना करते हैं कि वह हमें शुभ कार्यों की ओर प्रेरित करे'.

  ॐ भूर्भुवः स्वः' गायत्री मंत्र का एक भाग है.  इसका अर्थ है- ' हमारे मन को जगाने की अपील करते हुए हम माता से प्रार्थना करते हैं कि वह हमें शुभ कार्यों की ओर प्रेरित करे '.   'ॐ भूर्भुवः स्वः' के शब्दों के अर्थ:  ॐ - आदि ध्वनि, भूर् - भौतिक शरीर या भौतिक क्षेत्र, भुव - जीवन शक्ति या मानसिक क्षेत्र, स्व - जीवात्मा.   गायत्री मंत्र के अन्य शब्दों के अर्थ:   तत् - वह (ईश्वर) सवितुर - सूर्य, सृष्टिकर्ता (सभी जीवन का स्रोत) वरेण्यं - आराधना भर्गो - तेज (दिव्य प्रकाश) देवस्य - सर्वोच्च भगवान धीमहि - ध्यान धियो - बुद्धि को यो - जो नः - हमारी प्रचोदयात् - शुभ कार्यों में प्रेरित करें गायत्री मंत्र के नियमित जाप से मन शांत और एकाग्र रहता है.  मान्यता है कि इस मंत्र का लगातार जपा जाए, तो इससे मस्तिष्क का तंत्र बदल जाता है.  

History of Rameshar Mandir: A Comprehensive Overview

Rameshar Mandir, a prominent Hindu temple situated in Rameswaram, Tamil Nadu, holds a revered place in the annals of Indian religious and historical heritage. Dedicated to Lord Shiva, the temple's significance extends beyond mere architectural beauty, embodying deep-rooted mythological, historical, and cultural importance. This detailed exploration seeks to unravel the historical narrative surrounding Rameshar Mandir, from its ancient origins to its modern-day relevance. Origins and Mythological Significance The history of Rameshar Mandir is intrinsically linked with Hindu mythology, particularly the epic Ramayana. According to legend, the temple's origins trace back to the time of Lord Rama, a major deity in Hinduism and the protagonist of the Ramayana. The story narrates how, after the construction of the bridge (Rama's Bridge or Adam's Bridge) to Lanka, Lord Rama sought Lord Shiva's blessings for success in his battle against Ravana, the demon king. To appease Sh...

कुंभ मेला: महत्व, इतिहास और आध्यात्मिकता

  भूमिका कुंभ मेला हिंदू धर्म का सबसे बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन है, जिसे दुनिया का सबसे विशाल जनसमूह भी माना जाता है। यह मेला चार पवित्र स्थानों—हरिद्वार, प्रयागराज (इलाहाबाद), उज्जैन और नासिक—में हर 12 वर्षों के अंतराल पर आयोजित किया जाता है। इस महाकुंभ में करोड़ों श्रद्धालु, साधु-संत, अखाड़े और विभिन्न धर्मगुरु एकत्र होकर पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार, कुंभ मेले में स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। कुंभ मेला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, दर्शन और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। यह एक ऐसा अवसर है, जिसमें दुनिया भर से लोग आकर भारत की समृद्ध परंपराओं और आध्यात्मिकता का अनुभव करते हैं। 1. कुंभ मेले का पौराणिक महत्व (क) समुद्र मंथन और अमृत कलश की कथा कुंभ मेले की उत्पत्ति हिंदू धर्म की एक प्रसिद्ध कथा से जुड़ी हुई है, जिसे समुद्र मंथन के नाम से जाना जाता है। इस कथा के अनुसार, देवता (सुर) और असुरों ने मिलकर क्षीरसागर (दूध का सागर) का मंथन किया, जिससे कई दिव्य वस्तुएं प्राप्त ह...

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एकादशी क्या है? – एक आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण

  भूमिका भारतीय संस्कृति में व्रत और त्योहारों की एक समृद्ध परंपरा रही है, जिनका उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि मानसिक, शारीरिक और सामाजिक शुद्धि भी होता है। इसी परंपरा में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है — एकादशी व्रत । ‘एकादशी’ संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ होता है — "ग्यारहवां"। हिन्दू पंचांग के अनुसार, हर पक्ष (शुक्ल और कृष्ण) का ग्यारहवां दिन एकादशी कहलाता है। इस प्रकार एक वर्ष में लगभग 24 एकादशी आती हैं और अधिमास होने पर यह संख्या 26 तक पहुँच सकती है। एकादशी का धार्मिक महत्व एकादशी को भगवान विष्णु का प्रिय दिन माना गया है। यह दिन विष्णु भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र होता है। स्कंद पुराण, पद्म पुराण, भागवत पुराण, गरुड़ पुराण जैसे ग्रंथों में एकादशी व्रत की महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है। कहा गया है कि एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। एकादशी का मूल उद्देश्य है – इंद्रियों पर नियंत्रण, मन की स्थिरता, और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण । इस दिन व्यक्ति अन्न का त्याग करता है, जिससे तन और मन दोनो...

ME JANTA HU ?

 Me janta hu kisko me apne aap ko nahi janta kisi aur ko jankeme kya kar sakta hu  pahle apne aap ko jano fir ek baar apne aap ko jan gaye toh fir kisi ko janne ki jarurat bhi  nahi hai padegi . agr aap anpe aap ko sahi se jante ho toh aap puri life me khus raho ge kisi bhi hal me chahe aap ki jindgi me kitne bhi pareshani aayigi aap us se ashani se nikal sakte ho badi se badi saresani  aap ka kuch nahi bigad paegi wo kisi or ko janne se achaa aap apne aap ko jano or pahchano kyo ki. jo apne aap ko jan  gye wo sari duniya ko jane ki tagat rakhta hai fir chahe wo kuch bhi ho. achha jivan jine ke liye ye bahut jaruri hai aap apne ander ki saktiyo ki pahchan or jano ki aap ko is duniya me kya krne ke liye ishwar ne is duniya me aane diya apne ander ke rahsay ko janne ke baat hi duniya se rasay ko janne ki himmat kar sakte ho ....ye  duniya me jo khud ko jan gya wo puri duniya ka malik ban gya .......................................................................