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🌟 3 अप्रैल 2026 का संपूर्ण राशिफल एवं पंचांग | Friday Horoscope & Panchang

  🌟 3 अप्रैल 2026 का संपूर्ण राशिफल एवं पंचांग | Friday Horoscope & Panchang तिथि:  शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026 विक्रम संवत:  २०८२ शक संवत:  १९४७ ऋतु:  वसंत अयन:  उत्तरायण 📅 पंचांग – दिन का शुभाशुभ विवरण संक्षिप्त दृश्य:  आज का दिन मेष राशि में सूर्य के साथ प्रारंभ होता है, जो नई शुरुआत के लिए ऊर्जा प्रदान करता है। चंद्रमा कर्क राशि में संवेदनशीलता और अंतर्ज्ञान को बढ़ाता है। दिन का मुख्य आकर्षण मीन राशि में बुध और कर्क राशि में बृहस्पति के बीच सामंजस्यपूर्ण त्रिकोण (ट्राइन) है, जो संचार, शिक्षा और यात्रा के क्षेत्रों में सफलता का संकेत देता है। 📍 पंचांग सारांश तिथि:  फाल्गुन, कृष्ण पक्ष,  द्वादशी  (प्रातः 08:47 तक, तत्पश्चात त्रयोदशी) नक्षत्र:   श्रवण  (दोपहर 01:56 तक, तत्पश्चात धनिष्ठा) करण:  तैतुल (प्रातः 08:47 तक), तत्पश्चात गर योग:  शुभ (प्रातः 08:29 तक), तत्पश्चात शुक्ल वार:  शुक्रवार (भृगुवार) सूर्योदय:  प्रातः 06:12 (भारतीय मानक समयानुसार) सूर्यास्त:  सायं 06:37 (भारतीय मानक समयानुसार) चंद्रो...

Yug Yug Atal Shri Guru Gobind Sahib Ji

 Soorthi Mahala 1

 You are the best giver of charity. Main Kiya Magu Kichu Thiru Na Rahai Hari Dijai Namu Piari Jiu 1॥ Ghati Ghati Ravi Rahia Banwari Jali thali mahiali gupto vartai gur sabdi dekh nihari jiu stay Marat payal akasu show guri satiguri kirpa dhari jiu So brahmu is ajoni too must be seen within, murari jiu 2॥ Janam maran kau ihu jagu bpado ini dujai bhagati visari jiu Satiguru milait gurmati paaye sakat baji haari jiu 3॥ To break satgur bondage, nirare bahudi na garbha majhari jiu Nanak Gian Ratnu Pargasiya Hari Mani Vasiya Nirankari Jiu 4॥8॥

 


 Meaning:

 #O_Prabhu_ji! You are the giver of all things to us, you never fail to give your teeth, we are beggars at your rate. What do I ask of you? Nothing is going to last forever.

 Yes, it is your name which is everlasting. That's why #O_Hari! Give me your name, I will love your name.1.

 #God is pervasive in every body. It is present everywhere in the water, in the earth, on the earth, in the sky but is hidden. #Hey_man! See Him through Guru's Shabad. Stay.


 #Hey_brother! To the person on whom #Guru has blessed #Satiguru, he has shown the whole world, the earth, the sky, the whole world full of the existence of God. That #God does not come among the Junis, still exists, will be present in future also, #O brother! You see that Lord living in your heart.2.

 This fateless world is sitting on the cycle of birth and death because it has forgotten the devotion of God by falling in the illusion of Maya. If a #Satiguru is found, then by following the teachings of the #guru, one gets devotion to the Lord, but the Maya-obsessed creatures break away from devotion and lose the battle of human birth.3.

 #Satiguru! The people whom you detach from Maya by breaking the bonds of Maya, do not again fall into the cycle of birth and death. #O_Nanak! 4.9.

 

 Waheguru's Khalsa!

 Waheguru ji's fate!!

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हिंदू धर्म के अनुसार कलियुग का अंत

 कैलाश पर्वत के चारों ओर घूमा, जो वास्तव में भगवान के वास का स्थान माना जाता है, और अंततः मानवता की बुराईयों और अज्ञानता से लड़ते हुए, धर्म और सच्चाई की विजय की प्रतीक्षा करना चाहिए। यदि आप हिंदू धर्म के अनुसार कलियुग के अंत के विषय पर गहराई से जानना चाहते हैं, तो यहाँ एक विस्तृत जानकारी दी जा रही है, मैं आपको मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डालने की कोशिश करूंगा, जिससे आप इस विषय पर एक व्यापक दृष्टिकोण प्राप्त कर सकें।  हिंदू धर्म के अनुसार कलियुग का अंत 1. **कलियुग की परिभाषा और विशेषताएँ**    - **कलियुग**: हिंदू धर्म के अनुसार, कलियुग चार युगों (सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, और कलियुग) में से अंतिम युग है। यह युग पतन, अज्ञानता, और पाप का युग माना जाता है। इस युग में धर्म की कमी होती है और मनुष्य के आचरण में गिरावट आती है।    - **विशेषताएँ**: कलियुग में झूठ, अहंकार, और हिंसा की प्रधानता होती है। मानवता की नैतिकता और धर्म में कमी आती है, और यह युग अधिकतम सामाजिक और आध्यात्मिक समस्याओं से भरा हुआ होता है।  2. **कैल्युग का अंत: धार्मिक मान्यताएँ**    -...

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प्रातः काल प्रभु से अरदास

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ॐ भूर्भुवः स्वः' गायत्री मंत्र का एक भाग है. इसका अर्थ है- 'हमारे मन को जगाने की अपील करते हुए हम माता से प्रार्थना करते हैं कि वह हमें शुभ कार्यों की ओर प्रेरित करे'.

  ॐ भूर्भुवः स्वः' गायत्री मंत्र का एक भाग है.  इसका अर्थ है- ' हमारे मन को जगाने की अपील करते हुए हम माता से प्रार्थना करते हैं कि वह हमें शुभ कार्यों की ओर प्रेरित करे '.   'ॐ भूर्भुवः स्वः' के शब्दों के अर्थ:  ॐ - आदि ध्वनि, भूर् - भौतिक शरीर या भौतिक क्षेत्र, भुव - जीवन शक्ति या मानसिक क्षेत्र, स्व - जीवात्मा.   गायत्री मंत्र के अन्य शब्दों के अर्थ:   तत् - वह (ईश्वर) सवितुर - सूर्य, सृष्टिकर्ता (सभी जीवन का स्रोत) वरेण्यं - आराधना भर्गो - तेज (दिव्य प्रकाश) देवस्य - सर्वोच्च भगवान धीमहि - ध्यान धियो - बुद्धि को यो - जो नः - हमारी प्रचोदयात् - शुभ कार्यों में प्रेरित करें गायत्री मंत्र के नियमित जाप से मन शांत और एकाग्र रहता है.  मान्यता है कि इस मंत्र का लगातार जपा जाए, तो इससे मस्तिष्क का तंत्र बदल जाता है.  

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