सावन के महीने में सोमवार का महत्व क्यों बढ़ जाता है? जानिए धार्मिक, पौराणिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक कारण प्रस्तावना हिंदू धर्म में सावन (श्रावण) का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इस पूरे महीने में भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप, शिव चालीसा का पाठ और सोमवार का व्रत विशेष महत्व रखता है। लेकिन एक प्रश्न अक्सर लोगों के मन में आता है कि आखिर सावन के महीने में सोमवार का महत्व इतना अधिक क्यों होता है? क्या इसका कारण केवल धार्मिक आस्था है, या इसके पीछे कोई पौराणिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक आधार भी मौजूद है? इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि सावन सोमवार क्यों विशेष माने जाते हैं, इनके पीछे कौन-कौन सी मान्यताएँ हैं, व्रत रखने के क्या लाभ बताए गए हैं और पूजा किस प्रकार करनी चाहिए। --- सोमवार और भगवान शिव का संबंध सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवता को समर्पित माना गया है। - रविवार – सूर्य देव - सोमवार – भगवान शिव - मंगलवार – हनुमान जी एवं मंगल देव - बुधवार – भगवान गणेश - गुरुवार – भगवान विष्णु और बृहस्पति - शुक्रवार ...
क्या आत्मा वापस आती है? – पुनर्जन्म का रहस्य हिंदू धर्म की दृष्टि से क्या आपने कभी किसी छोटे बच्चे को ऐसी बातें करते सुना है, जो उसके जीवन से जुड़ी नहीं होतीं? क्या कभी आपको Déjà Vu यानी "पहले भी ये हुआ है" जैसा अहसास हुआ है? हो सकता है ये सब पुनर्जन्म पुनर्जन्म क्या है? हिंदू धर्म के अनुसार, जब कोई जीव मरता है तो उसकी आत्मा नष्ट नहीं होती, बल्कि वह कर्मों शास्त्रों में पुनर्जन्म का उल्लेख भगवद गीता: "जैसे मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्यागकर नए वस्त्र धारण करता है, वैसे ही आत्मा पुराने शरीर को छोड़कर नया शरीर धारण करती है।" उपनिषद: आत्मा अजर-अमर है, वह अनेक बार जन्म लेती है जब तक मोक्ष प्राप्त न हो। क्या आत्मा को याद रहता है पिछला जन्म? आमतौर पर आत्मा को नया शरीर मिलते ही पिछली स्मृतियां मिट जाती हैं। लेकिन कुछ दुर्लभ मामलों में, आत्मा की कुछ स्मृतियां बनी रहती हैं – खासकर बच्चों में। ऐसे अनेक केस भारत में पाए गए हैं जिनमें बच्चों ने अपने पिछले जन्म की बातें बताईं और सत्य भी सिद्ध हुईं। पुनर्जन्म क्यों होता है? अधूरे कर्म: जब जीवन में कोई का...